श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.64.41 
त्वयि तिष्ठति संत्रासात् पलायनपरायणा।
एतज्ज्ञात्वा महाबाहो कुरु प्राप्तमरिंदम॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले महारथी! आपके सामने मेरी सेना भयभीत होकर भाग रही है; यह जानकर इस समय जो भी कर्तव्य आपको सौंपा जाए, उसे कीजिए। ॥41॥
 
O mighty warrior, destroyer of enemies! In your presence my army is fleeing in fear; knowing this, do whatever duty is assigned to you at this time. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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