श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  8.64.38 
तिष्ठ तिष्ठेति च तत: सूतपुत्रस्य जल्पत:।
नावतिष्ठति सा सेना वध्यमाना महात्मभि:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
सारथीपुत्र कर्ण बार-बार चिल्लाता रहा, "रुको, रुको!" किन्तु महामनस्वी पाण्डवों की सेना आक्रमण होने पर भी न रुक सकी। 38
 
The son of a charioteer, Karna kept on shouting, "Wait, wait!" but the army of the great-minded Pandavas could not stop after being attacked. 38
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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