vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार
»
श्लोक 38
श्लोक
8.64.38
तिष्ठ तिष्ठेति च तत: सूतपुत्रस्य जल्पत:।
नावतिष्ठति सा सेना वध्यमाना महात्मभि:॥ ३८॥
अनुवाद
सारथीपुत्र कर्ण बार-बार चिल्लाता रहा, "रुको, रुको!" किन्तु महामनस्वी पाण्डवों की सेना आक्रमण होने पर भी न रुक सकी। 38
The son of a charioteer, Karna kept on shouting, "Wait, wait!" but the army of the great-minded Pandavas could not stop after being attacked. 38
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas