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mahabharat 8.64.35: हे मनुष्यों के स्वामी! हे प्रजानाथ! यह सब कुछ आपके पुत्रों, सुबलपुत्र शकुनि और कर्ण के देखते-देखते घटित हो रहा था, जो ऐसा विचित्र युद्ध कर रहे थे॥35॥   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.64.35 
पश्यतां ते महाराज पुत्राणां चित्रयोधिनाम्।
शकुने: सौबलेयस्य कर्णस्य च विशाम्पते॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! हे प्रजानाथ! यह सब कुछ आपके पुत्रों, सुबलपुत्र शकुनि और कर्ण के देखते-देखते घटित हो रहा था, जो ऐसा विचित्र युद्ध कर रहे थे॥35॥
 
O lord of men! O Prajanath! All this was happening in front of the eyes of your sons, Shakuni, the son of Subala, and Karna, who were fighting such a strange war. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)