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पश्यतां ते महाराज पुत्राणां चित्रयोधिनाम्।
शकुने: सौबलेयस्य कर्णस्य च विशाम्पते॥ ३५॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! हे प्रजानाथ! यह सब कुछ आपके पुत्रों, सुबलपुत्र शकुनि और कर्ण के देखते-देखते घटित हो रहा था, जो ऐसा विचित्र युद्ध कर रहे थे॥35॥
O lord of men! O Prajanath! All this was happening in front of the eyes of your sons, Shakuni, the son of Subala, and Karna, who were fighting such a strange war. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥