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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.64.31 
तत: प्रहस्य बीभत्सुर्द्रोणपुत्रस्य संयुगे।
क्षिप्रं रश्मीनथाश्वानां क्षुरप्रैश्चिच्छिदे जय:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विजयी अर्जुन ने मुस्कुराते हुए युद्धभूमि में द्रोणपुत्र के घोड़ों की लगाम अपने छुरों से शीघ्रतापूर्वक काट डाली।
 
Thereafter victorious Arjuna, smiling, quickly cut the reins of Drona's son's horses on the battlefield with his razor-sharps.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)