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mahabharat 8.64.27: तत्पश्चात् अर्जुन ने गुरुपुत्र के नाभिस्थानों को सौ बाणों से बींध डाला और आपके पुत्रों के सामने ही उसके घोड़ों, सारथि, धनुष और प्रत्यंचा पर बाणों की वर्षा की।   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.64.27 
ततोऽर्जुन: सायकानां शतेन
गुरो: सुतं मर्मसु निर्बिभेद।
अश्वांश्च सूतं च तथा धनुर्ज्या-
मवाकिरत् पश्यतां तावकानाम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अर्जुन ने गुरुपुत्र के नाभिस्थानों को सौ बाणों से बींध डाला और आपके पुत्रों के सामने ही उसके घोड़ों, सारथि, धनुष और प्रत्यंचा पर बाणों की वर्षा की।
 
Thereafter Arjuna pierced the vital spots of the Guru's son with a hundred arrows and in front of your sons he showered arrows on his horses, charioteer, bow and bowstring.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)