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mahabharat 8.64.26: तत्पश्चात् अश्वत्थामा ने अपने बाणों से अर्जुन के बाणों की वर्षा को रोककर और अपना नाम प्रकट करके, सहसा सौ बाणों से श्रीकृष्ण को घायल कर दिया और अर्जुन पर भी तीन सौ बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  8.64.26 
विगाह्य तां पाण्डवबाणवृष्टिं
शरै: परं नाम तत: प्रकाश्य।
शतेन कृष्णं सहसाभ्यविद्‍ध्यत्
त्रिभि: शतैरर्जुनं क्षुद्रकाणाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अश्वत्थामा ने अपने बाणों से अर्जुन के बाणों की वर्षा को रोककर और अपना नाम प्रकट करके, सहसा सौ बाणों से श्रीकृष्ण को घायल कर दिया और अर्जुन पर भी तीन सौ बाणों से आक्रमण किया।
 
Thereafter Ashvatthama, having warded off Arjuna's shower of arrows with his own arrows and making his name known, suddenly wounded Sri Krishna with a hundred arrows and also attacked Arjuna with three hundred arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)