श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.64.22 
स पपात तदा भूमौ निकृत्त: पार्थसायकै:।
विकीर्ण: पर्वतो राजन् यथा वज्रेण ताडित:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जैसे वज्र से आहत पर्वत टुकड़े-टुकड़े होकर सर्वत्र बिखर जाता है, उसी प्रकार वह परिघ उस समय अर्जुन के बाणों से कटकर पृथ्वी पर गिर पड़ा।
 
O lord of men! Just as a mountain struck by thunderbolt breaks into pieces and scatters everywhere, in the same way that Parigha, cut by Arjun's arrows, fell on the earth at that time.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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