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श्लोक 8.64.21  |
तमापतन्तं परिघं जाम्बूनदपरिष्कृतम्।
चिच्छेद सहसा राजन् प्रहसन्निव पाण्डव:॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! उस सुवर्ण-सज्जित परिघ को सहसा अपनी ओर आता देख पाण्डुपुत्र अर्जुन ने हँसकर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये। |
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| King! Seeing that golden-decorated Parigha suddenly coming towards him, Pandu's son Arjuna laughingly broke it into pieces. |
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