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mahabharat 8.64.18-19: भरत! गाण्डीवधारी और उदारचित्त अर्जुन युद्धस्थल में द्रोणपुत्र के द्वारा अत्यन्त घायल हो गये और उन्होंने बाणों की वर्षा से अश्वत्थामा को आच्छादित कर दिया तथा उसका धनुष भी काट डाला॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  8.64.18-19 
सोऽतिविद्धो रणे तेन द्रोणपुत्रेण भारत॥ १८॥
गाण्डीवधन्वा प्रसभं शरवर्षैरुदारधी:।
संछाद्य समरे द्रौणिं चिच्छेदास्य च कार्मुकम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भरत! गाण्डीवधारी और उदारचित्त अर्जुन युद्धस्थल में द्रोणपुत्र के द्वारा अत्यन्त घायल हो गये और उन्होंने बाणों की वर्षा से अश्वत्थामा को आच्छादित कर दिया तथा उसका धनुष भी काट डाला॥18-19॥
 
Bharata! Arjuna, the bearer of Gandiva and having a generous mind, was severely wounded by Drona's son on the battlefield and covered Ashwatthama with a shower of arrows and also cut off his bow.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)