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mahabharat 8.64.15-17h: घोड़े खुल गये और वे सब दिशाओं में दौड़ने लगे। युद्ध में शोभायमान अर्जुन का पराक्रम देखकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा तुरन्त उनके पास आया और अपने विशाल स्वर्ण-जटित धनुष को घुमाकर उसने समस्त विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन को तीखे बाणों से चारों ओर से आच्छादित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 15-17h
 
 
श्लोक  8.64.15-17h 
हयाश्च पर्यधावन्त मुक्तयोक्त्रास्ततस्तत:।
तद् दृष्ट्वा कर्म पार्थस्य द्रौणिराहवशोभिन:॥ १५॥
अर्जुनं जयतां श्रेष्ठं त्वरितोऽभ्येत्य वीर्यवान्।
विधुन्वानो महच्चापं कार्तस्वरविभूषितम्॥ १६॥
अवाकिरत्ततो द्रौणि: समन्तान्निशितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
घोड़े खुल गये और वे सब दिशाओं में दौड़ने लगे। युद्ध में शोभायमान अर्जुन का पराक्रम देखकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा तुरन्त उनके पास आया और अपने विशाल स्वर्ण-जटित धनुष को घुमाकर उसने समस्त विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन को तीखे बाणों से चारों ओर से आच्छादित कर दिया।
 
The horses were untied and they began running in all directions. Seeing the valour of Arjuna, who was adorned with glory in battle, the valiant son of Drona, Ashwatthama, immediately came to him and, swinging his huge bow adorned with gold, he covered Arjuna, the best of all victorious warriors, from all sides with sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)