श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.64.12 
तयोस्तु व्याकुले युद्धे द्रौणे: पार्थस्य दारुणे।
अमर्यादं योधयन्त: पर्यधावन्त पृष्ठत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा और अर्जुन के उस घोर एवं उग्र युद्ध में समस्त योद्धा मर्यादाहीन होकर युद्ध करते हुए इधर-उधर भागने लगे॥12॥
 
In that fierce and heated battle between Ashvatthama and Arjun, all the warriors started running back and forth everywhere while fighting without any dignity. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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