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mahabharat 8.63.d3-36: युधिष्ठिर ने कहा, "हे पाण्डु के वीर पुत्रों! तुम दोनों शीघ्रता से उस स्थान पर जाओ, जहाँ भीमसेन खड़े हैं। वहाँ भीमसेन मेघ के समान जोर से गर्जना करते हुए युद्ध कर रहे हैं।"   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक d3-36
 
 
श्लोक  8.63.d3-36 
(युधिष्ठिर उवाच
गच्छतां त्वरितौ वीरौ यत्र भीमो व्यवस्थित:॥ )
अनीकं भीमसेनस्य पाण्डवावाशु गच्छताम्।
जीमूत इव नर्दंस्तु युध्यते स वृकोदर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "हे पाण्डु के वीर पुत्रों! तुम दोनों शीघ्रता से उस स्थान पर जाओ, जहाँ भीमसेन खड़े हैं। वहाँ भीमसेन मेघ के समान जोर से गर्जना करते हुए युद्ध कर रहे हैं।"
 
Yudhishthira said, "O brave sons of Pandu! Both of you quickly go to the place where Bhimasena is standing. There Bhimasena is fighting while roaring loudly like a cloud."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)