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mahabharat 8.63.7: इसी प्रकार राजा युधिष्ठिर ने भी राधापुत्र कर्ण की छाती पर गहरा घाव किया और फिर तीन बाणों से सारथि और चार बाणों से चारों घोड़ों को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.63.7 
तथैव राजा राधेयं प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे।
शरैस्त्रिभिश्च यन्तारं चतुर्भिश्चतुरो हयान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार राजा युधिष्ठिर ने भी राधापुत्र कर्ण की छाती पर गहरा घाव किया और फिर तीन बाणों से सारथि और चार बाणों से चारों घोड़ों को घायल कर दिया।
 
Similarly, King Yudhishthira also inflicted a deep wound on the chest of Radha's son Karna. Then he injured the charioteer with three arrows and the four horses with four arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)