Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.63.37-38: तत्पश्चात्, शत्रुघ्न के दोनों भाई, महारथी नकुल और महाप्रतापी सहदेव, दूसरे रथ पर बैठकर अपने तीव्रगामी घोड़ों पर सवार होकर भीमसेन के पास पहुँचे। तब दोनों पराक्रमी भाई भीमसेन के सैनिकों के साथ खड़े होकर युद्ध करने लगे। | mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, शत्रुघ्न के दोनों भाई, महारथी नकुल और महाप्रतापी सहदेव, दूसरे रथ पर बैठकर अपने तीव्रगामी घोड़ों पर सवार होकर भीमसेन के पास पहुँचे। तब दोनों पराक्रमी भाई भीमसेन के सैनिकों के साथ खड़े होकर युद्ध करने लगे।
Thereafter, sitting on another chariot, Nakula, the best of charioteers, and Sahadeva, the illustrious ones, both the brothers of Shatrughan, reached Bhimasena on their fast horses. Then both the powerful brothers stood with Bhimasena's soldiers and started fighting.
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि धर्मापयाने त्रिषष्टितमोऽध्याय:॥ ६३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें युधिष्ठिरका पलायनविषयक तिरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४० १/२ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥