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mahabharat 8.63.33-34: वह राजा नकुल और सहदेव के साथ लज्जित होकर तुरन्त शिविर में पहुँचा और रथ से उतरकर एक सुन्दर शय्या पर लेट गया। उस समय उसका सारा शरीर बाणों से घायल हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  8.63.33-34 
ताभ्यां स सहितस्तूर्णं व्रीडन्निव नरेश्वर:॥ ३३॥
प्राप्य सेनानिवेशं च मार्गणै: क्षतविक्षत:।
अवतीर्णो रथात्तूर्णमाविशच्छयनं शुभम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह राजा नकुल और सहदेव के साथ लज्जित होकर तुरन्त शिविर में पहुँचा और रथ से उतरकर एक सुन्दर शय्या पर लेट गया। उस समय उसका सारा शरीर बाणों से घायल हो रहा था।
 
That king, accompanied by Nakula and Sahadeva, immediately reached the camp feeling ashamed, got down from the chariot and lay down on a beautiful bed. At that time his whole body was being wounded by arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)