Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.63.32-33h: माननीय महाराज! मद्रराज शल्य के घोड़े ऐसे दौड़ रहे थे मानो आकाश में उड़ रहे हों। कर्ण के चले जाने पर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर और सहदेव अपने तीव्रगामी घोड़ों पर सवार होकर वहाँ से भाग निकले। | mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माननीय महाराज! मद्रराज शल्य के घोड़े ऐसे दौड़ रहे थे मानो आकाश में उड़ रहे हों। कर्ण के चले जाने पर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर और सहदेव अपने तीव्रगामी घोड़ों पर सवार होकर वहाँ से भाग निकले।
Honorable King! The horses driven by Madra King Shalya were running as if they were flying in the sky. After Karna left, Kunti's son Yudhishthira and Sahadeva fled from there on their fast horses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥