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श्लोक 8.63.28-29h  |
परित्राह्येनमभ्येत्य संशयं परमं गतम्॥ २८॥
किं नु माद्रीसुतौ हत्वा राजानं च युधिष्ठिरम्। |
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| अनुवाद |
| तुम जाकर राजा दुर्योधन की रक्षा करो, जो अपने जीवन के विषय में महान् संशय में है। आज माद्री के पुत्रों नकुल-सहदेव और राजा युधिष्ठिर को मारने से क्या सिद्ध होगा?॥28 1/2॥ |
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| ‘You go and save King Duryodhan who is in great doubt about his life. What will be achieved by killing Madri's sons Nakula-Sahadeva and King Yudhishthira today?'॥ 28 1/2॥ |
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