श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  8.63.28-29h 
परित्राह्येनमभ्येत्य संशयं परमं गतम्॥ २८॥
किं नु माद्रीसुतौ हत्वा राजानं च युधिष्ठिरम्।
 
 
अनुवाद
तुम जाकर राजा दुर्योधन की रक्षा करो, जो अपने जीवन के विषय में महान् संशय में है। आज माद्री के पुत्रों नकुल-सहदेव और राजा युधिष्ठिर को मारने से क्या सिद्ध होगा?॥28 1/2॥
 
‘You go and save King Duryodhan who is in great doubt about his life. What will be achieved by killing Madri's sons Nakula-Sahadeva and King Yudhishthira today?'॥ 28 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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