श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  8.63.23-24h 
असौ निघ्नन् रथोदारानर्जुन: शरवृष्टिभि:॥ २३॥
सर्वां ग्रसति न: सेनां कर्ण पश्यैनमाहवे।
 
 
अनुवाद
कर्ण! यह अर्जुन अपने बाणों की वर्षा से महारथियों का संहार कर रहा है और हमारी समस्त सेना का संहार कर रहा है। युद्धस्थल में इसे तो देखो॥ 23 1/2॥
 
Karna! This Arjuna is killing great charioteers with his shower of arrows and is destroying our entire army. Just look at him on the battlefield.॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)