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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  8.63.22-23h 
शङ्खयोर्ध्मायतो: शब्द: सुमहानेष कृष्णयो:॥ २२॥
श्रूयते चापघोषोऽयं प्रावृषीवाम्बुदस्य ह।
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण और अर्जुन शंख बजा रहे हैं और यह महान ध्वनि सुनाई दे रही है। उनके धनुष की गम्भीर ध्वनि वर्षा ऋतु के मेघों की गर्जना के समान है।
 
Sri Krishna and Arjuna are blowing their conches, and this great sound can be heard. The deep sound of their bow is like the roar of a rainy season cloud. 22 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)