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mahabharat 8.63.21-22h: राधापुत्र! कुन्तीपुत्र अर्जुन को मार डालो, जिसके विरुद्ध युद्ध करने के कारण दुर्योधन सदैव तुम्हारा सम्मान करता आया है। युधिष्ठिर को मारकर तुम्हें क्या लाभ होगा?॥ 21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  8.63.21-22h 
यदर्थं धार्तराष्ट्रेण सततं मानितो भवान्॥ २१॥
तं पार्थं जहि राधेय किं ते हत्वा युधिष्ठिरम्।
 
 
अनुवाद
राधापुत्र! कुन्तीपुत्र अर्जुन को मार डालो, जिसके विरुद्ध युद्ध करने के कारण दुर्योधन सदैव तुम्हारा सम्मान करता आया है। युधिष्ठिर को मारकर तुम्हें क्या लाभ होगा?॥ 21 1/2॥
 
‘Son of Radha! Kill Arjuna, son of Kunti, against whom Duryodhan has always respected you for fighting. What will you gain by killing Yudhishthira?॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)