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mahabharat 8.63.20-21h: तब शल्य ने मुस्कुराते हुए युधिष्ठिर को मारने का निश्चय किया और अत्यन्त कुपित होकर रथ पर बैठे हुए कर्ण से यह कहा - ॥20 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  8.63.20-21h 
तत: शल्य: प्रहस्येदं कर्णं पुनरुवाच ह॥ २०॥
रथस्थमतिसंरब्धं युधिष्ठिरवधे धृतम्।
 
 
अनुवाद
तब शल्य ने मुस्कुराते हुए युधिष्ठिर को मारने का निश्चय किया और अत्यन्त कुपित होकर रथ पर बैठे हुए कर्ण से यह कहा - ॥20 1/2॥
 
Then smiling, Shalya decided to kill Yudhishthira and being very angry, he said this to Karna who was sitting on the chariot - ॥20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)