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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.63.2 
तेषां प्रयतमानानां राधेयस्य निवारणे।
रथान् पञ्चशतान् कर्ण: प्राहिणोद् यमसादनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने उन सभी पांच सौ रथियों को यमलोक भेज दिया जो राधा पुत्र कर्ण को रोकने का प्रयास कर रहे थे। 2.
 
He sent to Yamaloka all the five hundred charioteers who were trying to stop Radha's son Karna. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)