Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.63.18-20h: युद्धभूमि में मद्रराज शल्य के ऐसा कहने पर भी, क्रोध में भरे कर्ण ने युधिष्ठिर को बाणों से पीड़ा देना जारी रखा। माद्रीपुत्र नकुल और सहदेव को तीखे बाणों से घायल करने के बाद, कर्ण ने मुस्कुराते हुए युद्धभूमि में बाणों से युधिष्ठिर पर प्रहार करके उन्हें युद्ध से विमुख कर दिया। | mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युद्धभूमि में मद्रराज शल्य के ऐसा कहने पर भी, क्रोध में भरे कर्ण ने युधिष्ठिर को बाणों से पीड़ा देना जारी रखा। माद्रीपुत्र नकुल और सहदेव को तीखे बाणों से घायल करने के बाद, कर्ण ने मुस्कुराते हुए युद्धभूमि में बाणों से युधिष्ठिर पर प्रहार करके उन्हें युद्ध से विमुख कर दिया।
Even after Madra king Shalya said this on the battlefield, Karna, still filled with anger, continued to torment Yudhishthira with arrows. After wounding Madri's son Nakula and Sahadeva with sharp arrows, Karna smilingly turned Yudhishthira away from the battle by attacking him with arrows in the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥