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mahabharat 8.63.15: शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले मद्रराज मामा ने दोनों भाइयों को रथहीन देखकर राधापुत्र कर्ण से कृपापूर्वक कहा-॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.63.15 
तौ दृष्ट्वा मातुलस्तत्र विरथौ परवीरहा।
अभ्यभाषत राधेयं मद्रराजोऽनुकम्पया॥ १५॥
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले मद्रराज मामा ने दोनों भाइयों को रथहीन देखकर राधापुत्र कर्ण से कृपापूर्वक कहा-॥15॥
 
The maternal uncle, king of Madra, slayer of enemy warriors, seeing both the brothers without chariots, said kindly to Karna, son of Radha -॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)