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mahabharat 8.63.12: तत्पश्चात् महाधनुर्धर सूतपुत्र ने हँसते हुए दूसरे प्रहार से कुन्तीकुमार का शिरोभूषण गिरा दिया ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.63.12 
ततोऽपरेण भल्लेन शिरस्त्राणमपातयत्।
कौन्तेयस्य महेष्वास: प्रहसन्निव सूतज:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाधनुर्धर सूतपुत्र ने हँसते हुए दूसरे प्रहार से कुन्तीकुमार का शिरोभूषण गिरा दिया ॥12॥
 
After that, the great archer Sutaputra laughingly knocked down Kuntikumar's headgear with another blow. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)