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mahabharat 8.63.11: युधिष्ठिर के वे श्रेष्ठ घोड़े, जिनकी पूँछ और गर्दन काले रंग की थीं, जिनका शरीर श्वेत रंग का था तथा जिनकी गति मन के समान तीव्र थी, युद्धस्थल में राधापुत्र कर्ण द्वारा मारे गये।   |   mahabharat अध्याय 8.63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.63.11 
दन्तवर्णांस्तु राधेयो निजघान मनोजवान्।
युधिष्ठिरस्य संग्रामे कालवालान् हयोत्तमान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर के वे श्रेष्ठ घोड़े, जिनकी पूँछ और गर्दन काले रंग की थीं, जिनका शरीर श्वेत रंग का था तथा जिनकी गति मन के समान तीव्र थी, युद्धस्थल में राधापुत्र कर्ण द्वारा मारे गये।
 
Those excellent horses of Yudhishthira, whose tails and necks were black and whose bodies were white in colour and whose speed was as fast as the mind, were killed by Radha's son Karna in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)