श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 63: कर्णद्वारा नकुल-सहदेवसहित युधिष्ठिरकी पराजय एवं पीड़ित होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें जाकर विश्राम करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.63.1 
संजय उवाच
कर्णोऽपि शरजालेन केकयानां महारथान्।
व्यधमत् परमेष्वासानग्रत: पर्यवस्थितान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! कर्ण भी अपने बाणों के समूह से सामने खड़े हुए महाधनुर्धर केकय और महारथियों को नष्ट करने लगा।
 
Sanjaya says - O King! Karna also began to destroy the great archers Kekaya and Maharathi standing in front of him with his group of arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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