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mahabharat 8.62.29-30h: इसी प्रकार युधिष्ठिर ने भी कर्ण को स्वर्ण पंख वाले तीखे बाणों से घायल कर दिया। फिर कर्ण ने हँसते हुए शिला पर तीखे कंकपात्रों से तीन बाणों से पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर की छाती में चोट पहुँचाई।   |   mahabharat अध्याय 8.62: युधिष्ठिरपर कौरव-सैनिकोंका आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 62: युधिष्ठिरपर कौरव-सैनिकोंका आक्रमण  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  8.62.29-30h 
युधिष्ठिरश्चापि स तं स्वर्णपुङ्खै: शितै: शरै:।
प्रहसन्निव तं कर्ण: कङ्कपत्रै: शिलाशितै:॥ २९॥
उरस्यविध्यद् राजानं त्रिभिर्भल्लैश्च पाण्डवम्।
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार युधिष्ठिर ने भी कर्ण को स्वर्ण पंख वाले तीखे बाणों से घायल कर दिया। फिर कर्ण ने हँसते हुए शिला पर तीखे कंकपात्रों से तीन बाणों से पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर की छाती में चोट पहुँचाई।
 
Similarly, Yudhishthira also wounded Karna with sharp arrows having golden feathers. Then Karna laughingly wounded King Yudhishthira, son of Pandu, in the chest with three arrows having Kankpatra sharpened on a rock.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)