श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 62: युधिष्ठिरपर कौरव-सैनिकोंका आक्रमण  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  8.62.18-19h 
अन्तरिक्षे शरौघाणां पततां च परस्परम्॥ १८॥
संघर्षेण महाराज पावक: समजायत।
 
 
अनुवाद
महाराज! बाणों के समूहों के आपस में टकराने के घर्षण से आकाश में अग्नि प्रकट होती थी।
 
Maharaj! Fire used to appear in the sky due to the friction of the groups of arrows clashing with each other. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)