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mahabharat 8.61.74: राजन! बुद्धिमान भीमसेन का यह कार्य रुद्र द्वारा समस्त प्राणियों के संहार के समान जान पड़ता था।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  8.61.74 
भीमसेनस्य तत् कर्म राजन्नेकस्य धीमत:।
निघ्नत: सर्वभूतानि रुद्रस्येव च निर्बभौ॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
राजन! बुद्धिमान भीमसेन का यह कार्य रुद्र द्वारा समस्त प्राणियों के संहार के समान जान पड़ता था।
 
King! The act of the intelligent Bhimasena alone seemed like that of Rudra killing all living beings. 74
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संकुलयुद्धे एकषष्टितमोऽध्याय:॥ ६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संकुलयुद्धविषयक इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६१॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७४ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)