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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  8.61.73-74h 
तस्य ज्यातलनिर्घोषं श्रुत्वाशनिसमस्वनम्॥ ७३॥
विमुञ्चन्त: शकृन्मूत्रं गजा: प्रादुद्रुवुर्भृशम्।
 
 
अनुवाद
अपने धनुष की डोरियों की भयंकर ध्वनि सुनकर, जो बिजली की गड़गड़ाहट के समान थी, बहुत से हाथी मल-मूत्र त्यागते हुए बड़ी तेजी से भाग रहे थे। 73 1/2
 
Hearing the terrifying sound of their bowstrings, which were like the rumbling of lightning, many elephants were running away very fast, urinating and defecating. 73 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)