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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  8.61.70-71h 
ततो भिन्नकटा नागा भिन्नकुम्भकरास्तथा॥ ७०॥
दुद्रुवु: शतश: संख्ये भीमसेनशराहता:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भीमसेन के बाणों से घायल होकर, फटे हुए गुदा, फटे हुए कुंभस्थल और कटे हुए धड़ों वाले सैकड़ों हाथी युद्धभूमि में दौड़ने लगे।
 
Thereafter, hundreds of elephants with split anus, torn Kumbhsthal and severed trunks, hurt by Bhimasena's arrows, started running into the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)