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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.61.58 
तद् युद्धमासीत् सुमहद् घोररूपं परंतप।
यादृशं न मया युद्धं दृष्टपूर्वं विशाम्पते॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
परंतप! उन दोनों के बीच का वह महान युद्ध बड़ा भयंकर था। प्रजानाथ! मैंने ऐसा युद्ध पहले कभी नहीं देखा था।
 
Parantapa! That great battle between them was very fierce. Prajanath! I had never seen such a battle before.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)