श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  8.61.57 
उत्तमौजाश्च हार्दिक्यं भीमं भीमपराक्रमम्।
छादयामास सहसा मेघो वृष्ट्येव पर्वतम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर उत्तमौजा ने सहसा भयंकर पराक्रम और भयंकर रूप वाले कृतवर्मा को अपने बाणों से ढक लिया, जैसे मेघ जल की वर्षा से पर्वत को ढक लेता है ॥57॥
 
On the other hand, Uttamauja suddenly covered Kritavarma, who was of terrible power and fearsome appearance, with his arrows, just as a cloud covers a mountain with its rain of water. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)