Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.61.55-56: उधर युधमन्यु ने कृपाचार्य को घायल करके तुरंत ही उनका धनुष काट डाला। तत्पश्चात, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ कृपाचार्य ने दूसरा धनुष हाथ में लेकर युधमन्यु की ध्वजा, सारथि और छत्र को नष्ट कर दिया। तब महारथी युधमन्यु अपने रथ पर सवार होकर वहाँ से भाग निकले। | mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उधर युधमन्यु ने कृपाचार्य को घायल करके तुरंत ही उनका धनुष काट डाला। तत्पश्चात, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ कृपाचार्य ने दूसरा धनुष हाथ में लेकर युधमन्यु की ध्वजा, सारथि और छत्र को नष्ट कर दिया। तब महारथी युधमन्यु अपने रथ पर सवार होकर वहाँ से भाग निकले।
On the other hand, Yudhmanyu wounded Kripacharya and immediately cut off his bow. Thereafter, Kripacharya, the best among weapon holders, took another bow in his hand and destroyed Yudhmanyu's flag, charioteer and umbrella. Then the great warrior Yudhmanyu fled from there in his chariot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥