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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  8.61.51 
शैनेयशरसंछन्नं तव सैन्यं विशाम्पते।
भेजे दश दिशस्तूर्णं न्यपतच्च गतासुवत्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! सात्यकि के बाणों से आच्छादित आपकी सेना शीघ्रतापूर्वक दसों दिशाओं में भाग गई और प्राणहीन होकर भूमि पर गिरने लगी॥51॥
 
O Prajanath! Your army, covered with Satyaki's arrows, quickly fled in all ten directions and began falling lifelessly on the ground. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)