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mahabharat 8.61.48-49h: तत्पश्चात् उसने शीघ्रतापूर्वक बाण चलाकर शकुनि के घोड़ों को यमलोक भेज दिया। भरतश्रेष्ठ! तब शकुनि भी सहसा अपने रथ से कूद पड़ा और तुरंत ही महामनस्वी उलूक के रथ पर चढ़ गया। 48 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  8.61.48-49h 
अथास्य वाहांस्त्वरित: शरैर्निन्ये यमक्षयम्।
ततोऽवप्लुत्य सहसा शकुनिर्भरतर्षभ॥ ४८॥
आरुरोह रथं तूर्णमुलूकस्य महात्मन:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने शीघ्रतापूर्वक बाण चलाकर शकुनि के घोड़ों को यमलोक भेज दिया। भरतश्रेष्ठ! तब शकुनि भी सहसा अपने रथ से कूद पड़ा और तुरंत ही महामनस्वी उलूक के रथ पर चढ़ गया। 48 1/2॥
 
After that, he quickly shot arrows and sent Shakuni's horses to Yamalok. Bharatshrestha! Then Shakuni also suddenly jumped from his chariot and immediately climbed onto the chariot of the great-minded Uluk. 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)