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mahabharat 8.61.45: सात्यकि ने शकुनि को बीस तीखे बाणों से घायल करके हँसते हुए भाले से सुबलपुत्र की ध्वजा काट डाली।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.61.45 
सात्यकि: शकुनिं विद्‍ध्वा विंशत्या निशितै: शरै:।
ध्वजं चिच्छेद भल्लेन सौबलस्य हसन्निव॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि ने शकुनि को बीस तीखे बाणों से घायल करके हँसते हुए भाले से सुबलपुत्र की ध्वजा काट डाली।
 
Satyaki, having pierced Shakuni with twenty sharp arrows, smilingly cut off the flag of Subala's son with a spear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)