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mahabharat 8.61.44: प्रजानाथ! तत्पश्चात् अपने पिता को प्रसन्न करने वाला उलूक तुरन्त ही उस रथ से कूदकर त्रिगर्तों की सेना के पास गया।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.61.44 
उलूकस्तु ततो यानादवप्लुत्य विशाम्पते।
त्रिगर्तानां बलं तूर्णं जगाम पितृनन्दन:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तत्पश्चात् अपने पिता को प्रसन्न करने वाला उलूक तुरन्त ही उस रथ से कूदकर त्रिगर्तों की सेना के पास गया।
 
Prajanath! Thereafter, Uluk, who gave joy to his father, immediately jumped from that chariot and went to the army of Trigartas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)