श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  8.61.41-42h 
निवृत्ते तु तत: कर्णे नकुल: कौरवान् ययौ।
कर्णपुत्रस्तु समरे हित्वा नकुलमेव तु॥ ४१॥
जुगोप चक्रं त्वरितो राधेयस्यैव मारिष।
 
 
अनुवाद
आर्य! कर्ण के लौट जाने पर नकुल कौरव सेना की ओर बढ़े और कर्णपुत्र नकुल को पीछे छोड़कर शीघ्र ही युद्धभूमि में जाकर राधापुत्र कर्ण के रथ के पहियों की रक्षा करने लगे।
 
Arya! After Karna returned, Nakula moved towards the Kaurava army and Karna's son leaving Nakula behind, quickly went to the battlefield and started protecting the wheels of Radha's son Karna. 41 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)