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mahabharat 8.61.39: तत्पश्चात् उन दोनों श्रेष्ठ योद्धाओं ने सहस्रों बाणों द्वारा एक दूसरे को आच्छादित कर दिया। उसी समय कौरव सेना में भगदड़ मच गई ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  8.61.39 
तत: शरसहस्रेण तावुभौ पुरुषर्षभौ।
अन्योन्यमाच्छादयतामथोऽभज्यत वाहिनी॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन दोनों श्रेष्ठ योद्धाओं ने सहस्रों बाणों द्वारा एक दूसरे को आच्छादित कर दिया। उसी समय कौरव सेना में भगदड़ मच गई ॥39॥
 
Thereafter, those two best warriors covered each other with thousands of arrows. At this very moment there was a stampede in the Kaurava army. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)