Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.61.38: शत्रुसूदन! शक्तिशाली शत्रु द्वारा बुरी तरह घायल हुए वृषसेन ने अपने शत्रु नकुल को बीस बाणों से घायल कर दिया। फिर नकुल ने भी उसे पाँच बाणों से घायल कर दिया। | mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽतिविद्धो बलवता शत्रुणा शत्रुकर्षण।
शत्रुं विव्याध विंशत्या स च तं पञ्चभि: शरै:॥ ३८॥
अनुवाद
शत्रुसूदन! शक्तिशाली शत्रु द्वारा बुरी तरह घायल हुए वृषसेन ने अपने शत्रु नकुल को बीस बाणों से घायल कर दिया। फिर नकुल ने भी उसे पाँच बाणों से घायल कर दिया।
Shatrusudan! Vrishasena, who was severely wounded by the powerful enemy, pierced his enemy Nakula with twenty arrows. Then Nakula also wounded him with five arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥