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mahabharat 8.61.35: परन्तप! तत्पश्चात् आपके सैनिकों और शत्रुओं में घोर युद्ध आरम्भ हो गया, जो समस्त प्राणियों के लिए भयंकर था ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.61.35 
तत: प्रववृते युद्धं तावकानां परै: सह।
घोरं प्राणभृतां काले भीमरूपं परंतप॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
परन्तप! तत्पश्चात् आपके सैनिकों और शत्रुओं में घोर युद्ध आरम्भ हो गया, जो समस्त प्राणियों के लिए भयंकर था ॥35॥
 
Parantapa! Then a fierce battle began between your soldiers and the enemies, which was dreadful for all creatures. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)