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mahabharat 8.61.34: पाण्डु के ज्येष्ठ भ्राता राजन! तब सेनापति धृष्टद्युम्न की रक्षा के लिए पांचालों ने रथ, हाथी और घोड़ों सहित आपके पुत्र को चारों ओर से घेर लिया॥34॥   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.61.34 
तत: सरथनागाश्वा: पञ्चाला: पाण्डुपूर्वज।
सेनापतिं परीप्सन्तो रुरुधुस्तनयं तव॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु के ज्येष्ठ भ्राता राजन! तब सेनापति धृष्टद्युम्न की रक्षा के लिए पांचालों ने रथ, हाथी और घोड़ों सहित आपके पुत्र को चारों ओर से घेर लिया॥34॥
 
Pandu's eldest brother Rajan! Then, to protect the commander Dhrishtadyumna, the Panchalas along with chariots, elephants and horses surrounded your son from all sides. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)