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mahabharat 8.61.31: तत्पश्चात् आपके पुत्र ने हँसते हुए दूसरा धनुष हाथ में लेकर अपने बाणों के समूह से धृष्टद्युम्न को सब ओर से रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.61.31 
अथान्यद् धनुरादाय पुत्रस्ते प्रहसन्निव।
धृष्टद्युम्नं शरव्रातै: समन्तात् पर्यवारयत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आपके पुत्र ने हँसते हुए दूसरा धनुष हाथ में लेकर अपने बाणों के समूह से धृष्टद्युम्न को सब ओर से रोक दिया।
 
Thereafter, your son, smilingly taking another bow in his hand, blocked Dhrishtadyumna from all sides with his group of arrows. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)