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mahabharat 8.61.29: तत्पश्चात् उसने धृष्टद्युम्न के पास पहुँचकर उसकी भुजाओं और छाती पर सोने से मढ़े सत्रह अन्य बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.61.29 
अथान्यै: सप्तदशभिर्भल्लै: कनकभूषणै:।
धृष्टद्युम्नं समासाद्य वाह्वोरुरसि चार्पयत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने धृष्टद्युम्न के पास पहुँचकर उसकी भुजाओं और छाती पर सोने से मढ़े सत्रह अन्य बाणों से आक्रमण किया।
 
Thereafter reaching Dhrishtadyumna he attacked him with seventeen other arrows decorated with gold on his arms and chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)