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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.61.28 
आपतन्तं महावेगं धृष्टद्युम्नसमीरितम्।
शरैश्चिच्छेद पुत्रस्ते त्रिभिरेव विशाम्पते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! जब आपके पुत्र ने धृष्टद्युम्न के चलाये हुए उस भयंकर एवं शक्तिशाली बाण को अपनी ओर आते देखा, तो उसने उसे तीन बाणों से ही काट डाला।
 
O Prajanath! When your son saw that fierce and powerful arrow shot by Dhrishtadyumna coming towards him, he cut it with just three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)