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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन
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श्लोक 25
श्लोक
8.61.25
धृष्टद्युम्नो महाराज तव पुत्रेण पीडित:।
दु:शासनं त्रिभिर्बाणै: प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे॥ २५॥
अनुवाद
राजन! आपके पुत्र दु:शासन से व्याकुल होकर धृष्टद्युम्न ने उसकी छाती में तीन बाण मारे।
King! Being troubled by your son Dushasan, Dhrishtadyumna struck him deeply in the chest with three arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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