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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन
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श्लोक 24
श्लोक
8.61.24
तत: कर्णो महाराज पाण्डुसैन्यान्यशातयत्।
तूलराशिं समासाद्य यथा वायुर्महाबल:॥ २४॥
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् महाबली कर्ण पाण्डव सेनाओं का उसी प्रकार नाश करने लगा, जैसे वायु रुई के ढेर को नष्ट कर देती है।
Maharaj! Thereafter the mighty Karna began to destroy the Pandava armies like the wind destroying a heap of cotton.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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