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mahabharat 8.61.23: तब महाबली शिखण्डी अत्यन्त घायल होकर कर्ण के धनुष से छूटे हुए बाणों से बचने के लिए तुरन्त ही वहाँ से भाग गया॥23॥   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.61.23 
कर्णचापच्युतान् बाणान् वर्जयंस्तु नरोत्तम:।
अपयातस्ततस्तूर्णं शिखण्डी भृशविक्षत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली शिखण्डी अत्यन्त घायल होकर कर्ण के धनुष से छूटे हुए बाणों से बचने के लिए तुरन्त ही वहाँ से भाग गया॥23॥
 
Then the great man Shikhandi, who was greatly injured, immediately ran away from there to escape the arrows shot from Karna's bow. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)